नए भारत के निर्माण में आरक्षण जरुरी है या प्रतिभा?

कुछ दिन पहले सीबीएसई जेईई मेन 2017 का रिजल्ट घोषित हुआ है। यह एग्जाम भारत के टॉप इंजीनियरिंग इंस्टीटूशन्स में एड्मिशन के लिए होती है। इसके अलावा आप बी.टेक और बी.आर्क में भी जेईई मेन के जरिये एड्मिशन ले सकते है। वर्ष 2017 का कट ऑफ कुछ इस प्रकार है।    

GEN - 81 Marks 

OBC-NCL - 49 Marks 

SC - 32 Marks 

ST - 27 Marks

अब एक बार सभी केटेगरी के कट ऑफ पर नजर दौड़ाइये -

Source = Sarvgyan

जनरल केटेगरी में केवल वही छात्र सेलेक्ट हुआ है। जिसने एग्जाम में 81 या इससे अधिक मार्क्स लाया है। अर्थात 


  1. 80 मार्क्स लाने वाला छात्र सिलेक्शन के लायक नहीं है।
  2. वह प्रतिभावान नहीं है।
  3. उसने इस साल एग्जाम की तैयारी में ठीक से मन नहीं लगाया।
  4. इस साल उसने मौका गँवा दिया।
  5. उसको अब अगले साल के लिए जम कर तैयारी करनी चाहिए।


या फिर 

  1. उसकी मर्जी, जो करे।
  2. चाहे तो इससे अलग और कोई जनरल कॉम्पिटिशन की तैयारी करें।
  3. चाहे तो यह मान ले कि इस एग्जाम में सेलेक्ट होना उसके बस की बात नहीं है।
  4. चाहे तो फिर मां-बाप के साथ किसानी में हाथ बटाये।
  5. चाहे तो पान की छोटी सी गुमटी लगा ले।
अब इस बात से हम यह अनुमान लगा सकते है कि सरकार ऐसे मंद बुद्धि छात्रों को ढोने के लिए बाध्य नहीं है। भारत निर्माण में ऐसे 80 मार्क्स वाले कुपोषित छात्रों का क्या मतलब? देश की बुनियाद ठोस होनी चाहिए और ठोस बुनियाद के लिए डेवलप्ड स्किल का होना जरूरी है, इसलिए सरकार को किसी प्रकार का रिस्क नहीं लेना चाहिए और नव भारत निर्माण के लिए कोई समझौता नहीं करना चाहिए।

अब आइये SC/ ST के कट ऑफ मार्क्स पर नजर डालें-

Source = Indianexpress

इस बार SC/ ST केटेगरी में वही छात्र सेलेक्ट हुआ है। जिसने एग्जाम में 32/27 तक मार्क्स प्राप्त किया है। अर्थात


  • 27/32 तक मार्क्स लाने वाला छात्र इसके लायक है।
  • मतलब कि वह प्रतिभा का धनी है।
  • इस साल उसने एग्जाम के लिए जम कर तैयारी की थी।
  • मतलब कि ऐसे होनहार छात्रों का देश निर्माण में अहम योगदान है। 
  • सरकार नहीं चाहती कि ऐसे होनहार छात्र कोई पान की गुमटी लगाए या जनरल कॉम्पिटिशन की तैयारी कर कोई क्लर्क बने या किसानी करें।
आखिर एक सजग सरकार को इसकी प्रतिभा का अपमान करने का किसने हक दिया है? नव भारत निर्माण के लिए ऐसे 27/32 वाले प्रतिभावान छात्रों को इग्नोर कैसे किया जा सकता है?...आखिर देश की बुनियाद को मजबूत करने की बात है, कोई मजाक नहीं।

DRDO रिक्रूटमेंट 2017 - सिर्फ SC/ST/OBC के लिए

Source = Dailyrecruitment

डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) ने हाल ही में 23 साइंटिस्ट के लिए रिक्रूटमेंट शुरू की है। जिसमें चौकाने वाली बात यह है कि इस एग्जाम में केवल SC/ST/OBC कैंडिडेट ही अप्लाई कर सकते है। सामान्य वर्ग के लिए यहाँ कोई जगह नहीं है।

  • क्या यह सही है?
  • क्या सामान्य वर्ग के साथ ये भेदभाव नहीं है?
  • कब तक आरक्षण को जातियों में विभाजित करते रहेंगे?

ये वो सवाल है, जो आज हर किसी ने मन में है। परन्तु इनका जवाब किसी के पास नहीं है। हालांकि उत्तर प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरक्षण पर हथोड़ा चलाने की शुरुआत करते हुए, यूपी में मेडिकल कॉलेजो को आरक्षण से मुक्ति दिलाते हुए SC/सत/OBC कोटा खत्म कर दिया है।  

इस लेख को पढ़ने वाले सभी लोगों से हमारा अनुरोध है कि इस लेख का गलत अर्थ न निकाले। यहाँ हम केवल यह बताना चाहते है कि अगर भारत को नई उचाईयों तक पहुँचाना है तो आरक्षण को शिक्षा से दूर रखना होगा, हर जाति और वर्ग को आगे बढ़ाने के लिए यह कदम सरकार को जरूर उठाना होगा, क्योंकि अगर हर वर्ग को मजबूत बनाना है तो आरक्षण जैसे दीमक को देश को खोखला करने से रोकना बहुत आवश्यक है।


   
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