पोखरण परमाणु परीक्षण की 19 वी वर्षगाँठ पर मोदी ने की अटल जी के साहस की प्रंशसा

11 मई 1998 को हुए ‘पोखरण परमाणु परीक्षण’के 19 साल पूरे

7 months ago
पोखरण परमाणु परीक्षण की 19 वी वर्षगाँठ पर मोदी ने की अटल जी के साहस की प्रंशसा

11 मई 1998 को हुए ‘पोखरण परमाणु परीक्षण’के 19 साल पूरे हो गए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी 19 वी वर्षगांठ पर मनाये जाने वाले 'राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी दिवस' के अवसर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा दिखाए गए साहस की प्रशंसा की। 

आपको बता दे कि वर्ष 1998 में, 11 मई के दिन भारत ने अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में पोखरण में पांच परमाणु परीक्षणों में से पहला परीक्षण किया था।

मोदी ने ट्वीट कर कहा, “राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस पर हर किसी को बधाई, खासतौर से हमारे परिश्रमी वैज्ञानिकों और तकनीक के प्रति जुनूनी लोगों को. हम 1998 में पोखरण में दिखाए गए साहस के लिए हमारे वैज्ञानिकों और उस समय के राजनीतिक नेतृत्व के प्रति आभारी हैं.’ भारत के वैज्ञानिक कौशल और तकनीकी प्रगति को चिह्नित करने के लिए वर्ष 1999 से 11 मई के दिन को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में मनाया जाता है।”

भारत ने किया था अपनी ताकत का प्रदर्शन

11 मई के दिन पहला तथा 13 मई के दिन दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। इन परीक्षणों के जरिये भारत ने पूरे विश्व में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया था। आपको बता दे कि नरेंद्र मोदी डॉट इन वेबसाइट पर एक लेख में मोदी का एक भाषण है। जिसमे मोदी ने इसका जिक्र भी किया है।

मोदी ने कहा था, "दुनिया पोखरण परीक्षण के बारे में अच्छी तरह जानती है। अटल जी के नेतृत्व में सफलतापूर्वक परीक्षण किए गए और पूरे विश्व ने भारत की ताकत को देखा। वैज्ञानिकों ने देश को गौरवान्वित किया"

अटल जी का था अलग ही मिजाज

Source = Deccanchronicle

मोदी ने करीब दो दशक पहले हुए परीक्षणों को याद किया और कहा की परीक्षणों की पहली श्रृंखला के बाद विश्व समुदाय ने भारत पर प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन इसके बावजूद 13 मई 1998 को अटल बिहारी वाजपेयी (5.2-6) जी ने फिर से परीक्षण किया। इससे आप अंदाजा लगा सकते है कि अटल जी अलग ही मिजाज के व्यक्ति है। 

मोदी ने आगे कहा "अगर हमारे पास एक कमजोर प्रधानमंत्री होता तो वह उसी दिन डर गया होता या होती लेकिन अटल जी अलग थे। वह डरे नहीं." "परीक्षणों की योजना बनाने और उन्हें करने के दौरान चुप्पी साधे रखने के लिए पोखरण के लोगों की भी तारीफ होनी चाहिए। उन्होंने हर किसी चीज से उपर राष्ट्र के हित को तरजीह दी"


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