गूगल कर सकता है कंप्यूटर पर जीमेल सेवा बंद

गूगल ने घोषणा की है कि इस साल 2017 के अंत तक कुछ क्रो

6 months ago
गूगल कर सकता है कंप्यूटर पर जीमेल सेवा बंद

गूगल ने घोषणा की है कि इस साल 2017 के अंत तक कुछ क्रोम ब्राउज़र पर जीमेल सर्विस काम करना बंद कर दी जाएगी।

गूगल ने एक ब्लॉग के माध्यम से बताया कि जीमेल सेवाएं 53 या लौ संस्करण के क्रोम ब्राउज़र पर समाप्त कर दी जाएंगी। गूगल 8 फरवरी से इन संस्करणों पर जीमेल सर्विस बंद करने का शुरू करने वाला है।

इसका मतलब यह है कि विंडोज एक्स-पी और विंडोज विस्टा उपयोगकर्ताओं को अब चिंता करना शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि जीमेल की सुविधा अब उनके क्रोम ब्राउज़र पर अधिक समय तक उपलब्ध नहीं रहने वाली है।

क्यों यह कार्रवाई की जा रही है?

गूगल के अनुसार, क्रोम ब्राउज़र के 53 और निचले संस्करणों पर सुरक्षा जोखिम के चलते, माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज एक्स-पी और विंडोज विस्टा का ओएस सपोर्ट बंद कर दिया है। इसके अलावा, इन उपयोगकर्ताओं को बग फिक्स करने के लिए किसी भी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

जीमेल साल के अंत तक इन संस्करणों पर काम कर सकता है, लेकिन केवल मूल HTML संस्करण पर ही। गूगल के ब्लॉग के कुछ अंश यहाँ मौजूद है।

“Gmail users that are still on Windows XP and Windows Vista are the most likely to be affected because v49 was the last released version which supported those operating systems.”

जो यूजर्स V53 या उसके बिलो क्रोम ब्राउज़र का प्रयोग कर रहे है। उनकी स्क्रीन पर एक मैसेज या बैनर फ्लैश होगा। हालांकि, उन्होंने क्रोम के पुराने संस्करणों को सपोर्ट न करने की घोषणा नहीं की है, क्योंकि यह उनकी मौजूदा ब्राउज़र समर्थित नीति है।

“Google does not typically announce when we discontinue support for older versions of Chrome browser because of our current supported browser policy, which states that only the most recent versions of Chrome are supported. This announcement was made given the expected impact on Windows XP and Windows Vista users and known security risks.”

यह महत्वपूर्ण है कि उपयोगकर्ताओं को ओर अधिक सुरक्षित और समर्थित प्रणालियों के लिए अनुकूल है। अगर आप विंडोज एक्स-पी और विंडोज विस्टा अभी भी प्रयोग करते है तो नए ओएस को अपग्रेड करना होगा। अन्य ब्राउज़रों पर भी जीमेल का उपयोग किया जा सकता है, लेकिन वे अभी भी हमले के लिए असुरक्षित ही रहेंगे।


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