ये मछली है या मच्छरों की दुश्मन - डेंगू और मलेरिया से दिलाएगी छुटकारा

डेंगू और मलेरिया की चपेट से अधिकांश लोग परेशान है। बारिश के मौसम में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है।

4 months ago
ये मछली है या मच्छरों की दुश्मन - डेंगू और मलेरिया से दिलाएगी छुटकारा

डेंगू और मलेरिया की चपेट से अधिकांश लोग परेशान है। बारिश के मौसम में इसका खतरा और भी बढ़ जाता है। इससे निजात पाने के लिए अब एक मछली का सहारा लिया जा रहा है।

आपने अब तक एक कहावत सुनी होगी की एक मछली पुरे तालाब को गन्दा कर देती है| लेकिन इस बार मामला उल्टा है ये मछली डेंगू और मलेरिया से छुटकारा दिलाएगी। इस मछली का नाम गम्बूजिया है।  

किस तरह करती है यह काम 

ये एक ऐसी मछली है जो दिल्ली को मच्छरों के संक्रामक हमले से बचा सकती है| ये मछली डेंगू-मलेरिया फैलाने वाले जानलेवा मच्छरों के लार्वा को खाकर मच्छरों के प्रकोप से बचा सकती है। 

नॉर्थ एमसीडी का डेंगू के खिलाफ प्रयास 

डेंगू-मलेरिया के मच्छरों से लड़ने के लिए नॉर्थ एमसीडी का स्वास्थ्य विभाग ईको-फ्रेंडली तरीकों को बढ़ावा दे रहा है|    

नॉर्थ एमसीडी गम्बूजिया मछली को बढ़ावा देकर मच्छरों पर काबू पाने के प्रयास में है| स्वास्थ्य विभाग गम्बूजिया मछली को मलेरिया और डेंगू के प्रकोप से छुटकारा दिलाने के लिए हथियार बनाने की तैयारी कर चुका है।  

इस तरह खायेगी ये मछली लार्वा

इसके लिए गम्बूजिया मछली को बारिश के मौसम शुरू होने के साथ ही पनपने वाले मच्छरों पर रोक लगाने के लिए तालाबों में छोड़ने की योजना शुरू कर दी है|

ये मछलियां डेंगू और मलेरिया के लार्वा मिलते ही उन्हें बहुत  तीव्रता के साथ खाना शुरू कर देती है। साथ ही ये मछलिया उतनी ही तेजी से बढ़ती है जितनी तेज गति से इन बीमारियों का लार्वा बढ़ता है।  

नॉर्थ एमसीडी के उप स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. प्रमोद वर्मा के अनुसार, गम्बूजिया मछली तालाबों के पानी में छोड़ा जायेगा ताकि ये डेंगू फैलाने वाले मादा ऐडीज मच्छर और मलेरिया फैलाने वाले मादा एनाफलीज मच्छरों को फैलने से रोक सके। यह मछली तालाब के पानी में अंडे देने वाले मच्छरों के लार्वा को ही मच्छर पैदा होने से पहले ही खा जाएगी जिससे मच्छरों की बढ़ती संख्या को कई हद तक रोका जा सकता है।  

गम्बूसिया मछली की खासियत

  • इस मछली को मच्छरों का दुश्मन कहा जाता है। इस मछली की खासियत है की यह दूसरी मछलियों की तुलना में नाले के पानी में भी जिन्दा रह लेती हैं। 
  • स्थानीय भाषा में इसे गटर गप्पी के नाम से जाना जाता हैं। यह अंडे नहीं देती, बल्कि बच्चे देती है। ये मछली तीन इंच तक लंबी होती है। इस मछली के बच्चे भी 2 mm होने पर मच्छरों के लार्वा को खाने लगते हैं।
  • आपको बता दें 24 घंटे में एक गम्बूसिया मछली 100 से 300 लार्वा खा सकती है| गम्बूसिया मछली को बढ़ाने के लिए 3 से 6 महीने का समय लगता है। 
  • एक मछली लगभग 4 से 5 साल तक जीवित रह सकती है और एक मछली में एक महीने में करीब 50 से 200 अंडे देने की क्षमता होती है।  
  • गुप्पी मछली की खोज ब्रिटिश नाविक जेम्स कुक ने की थी। कुक ने रॉयल ब्रिटिश नेवी में नौकरी की। यात्रा और भौगोलिक परिस्थियों के दौरान अधिकांश जगहों पर मच्छरों का प्रकोप रहता था इस कारण कुक ने इस समस्या को गप्पी मछली की सहायता से कम किया था।  
  • फिलहाल दिल्ली के कुछ तालाबों और पार्कों में वाटर बॉडीज बनाकर इन मछलियों को उनमें छोड़ा जाएगा|

Comment

Popular Posts