स्मार्ट ब्रा के जरिये 18 साल के युवा ने निकाला ब्रेस्ट कैंसर का सफल इलाज

अगर जनरली किसी से पूछा जाए कि आप 18 साल की उम्र में क्या कर रहे थे?

4 months ago
स्मार्ट ब्रा के जरिये 18 साल के युवा ने निकाला ब्रेस्ट कैंसर का सफल इलाज

अगर जनरली किसी से पूछा जाए कि आप 18 साल की उम्र में क्या कर रहे थे? तो आप बोलेगे हम दोस्तों के साथ मस्ती कर रहे थे या फिर किसी एग्जाम की तैयारी कर रहे थे या फॅमिली के साथ कहीं घूम रहे थे। आज हम आपको एक आश्चर्य चकित करने वाली बात बताने जा रहे है। दरअसल, मेक्सिको के एक 18 साल के निवासी जूलियन रिओस कैंटू ने एक ऐसा काम करके दिखया है। जिसके बारे में इस आयु के युवाओं को पता ही नहीं होता है।

जूलियन रिओस ने महज 18 साल की उम्र में एन्टर्प्रिनियर अवार्ड जीता है। यह सम्मान उन्हें एक ऐसी ब्रा बनाने के लिए दिया गया है। जिसके जरिये ब्रैस्ट कैंसर की शुरवात में ही यह आपको सूचित करता है। ब्रैस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाली सबसे आम बीमारियों में से एक है।

जूलियन कैसे सुझा यह आईडिया?

Source = Newstracklive

दरअसल, जूलियन रिओस जब 13 साल के थे, तब उनकी माँ ब्रैस्ट कैंसर से पीड़ित हुई थी और उनकी जान बहुत ही मुश्किल से बचाई जा सकी थी। उनकी माँ ने अपने इस बीमारी से पीड़ित होने पर अपने दोनों ब्रैस्ट निकलवा दिए थे। यह बात जूलियन के दिमाग में बैठ गई और वो तभी से लोगों को इस बीमारी के बारे में सचेत करते आ रहे है। फिर कुछ समय बाद अपने 3 दोस्तों के साथ मिलकर उन्होंने इस बीमारी से निजात पाने के लिए एक स्मार्ट ब्रा का अविष्कार कर दिया है।

इस स्मार्ट ब्रा में लगे सेंसर की मदद से ब्रैस्ट के आकर, कौन और गर्मी से उसमे होने वाले बदलावों का पता लगेगा और यह एप्प के जरिये यूजर को इसके बारे में सचेत करेगा।

ब्रैस्ट कैंसर अन्य नई खोज

Source = Lacenlingerie

कुछ समय पहले हुई एक शोध से पता चला है कि 11 दिन में ब्रैस्ट कैंसर को खत्म किया जा सकता है। इस शोध में ब्रिटैन के वैज्ञानिक ने ब्रैस्ट कैंसर की दो दवाओं टीवर्ब और हर्सेप्टिन को मिलाकर एकप्रयोग करके देखा। जिसके परिणाम वाकई में चमत्कारी थे।

वैज्ञानिकों द्वारा किये गए इस परीक्षण में 11 प्रतिशत महिलाओं को स्तन कैंसर से मुक्ति मिली है। वहीं 87 प्रतिशत महिलाओं में कैंसर की कोशिकाओं का निर्माण होना बंद हुआ है। इस प्रयोग के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि अब लाखों महिलाओं को कीमोथेरैपी से मुक्ति मिल सकती है।

ब्रिटिश वैज्ञानिक ने इस शोध के परिणामों को एम्सटर्डम में यूरोपीय ब्रीस्ट कैंसर कांफ्रेंस में सबके सामने रखा। उन्होंने यहाँ बताया कि कैंसर से पीड़ित मरीजों में इलाज के दौरान इतनी जल्दी असर कभी नहीं देखा है।

23 अस्पतालों में सफल रहा प्रयोग

Source = Healthday

ब्रिटेन के 23 अस्पतालों में एचईआर-2 कैंसर से पीड़ित महिलाओं पर इस नई थेरेपी से परिक्षण किया गया। इस परिक्षण से मिले नतीजों से वैज्ञानिक बहुत उत्साहित थे। उन्होंने बताया कि इस परिक्षण हमने पाया कि 17 प्रतिशत मरीजों का ट्यूमर अप्रत्याशित रूप से सिकुड़ चूका था।

वैज्ञानिकों का यह था मुख्य उद्देश्य

यूनिवर्सिटी ऑफ मैनचेस्टर (6.4-4) एवं लंदन के इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक की टीम ने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य सर्जरी के पहले दवा से ट्यूमर के शेप को कम करना और उसमें कुछ सिकुड़न होना था। डॉक्टरों ने बताया कि परिक्षण के बाद तथा सर्जरी के पहले जांच की गई तो उन्होंने पाया कि कुछ महिलाओ में कुछ दिन पहले ही 3 सेंटीमीटर का ट्यूमर था जो कुछ महिलाओं में पूरी तरह से गायब हो गया था।

आज तक नहीं सुना था

इस शोध के प्रोफेसर निगेल बंड्रेड ने बताया कि 11 दिन में ट्यूमर का गायब हो जाना आश्चर्य की बात है। इस शोध के रिजल्ट चौंकाने वाले है। कैंसर की दवाओं हर्सेप्टिन को ड्रिप से और टीवर्ब को टेबलेट के रूप में दिया गया। तो शोधकर्ता के रिजल्ट में पाया गया कि दवाओं का कॉम्बिनेशन ठीक हो तो वह अपना असर दिखती है। यह शोध 66 महिलाओं पर किया गया। जो तेजी से फैलने वाले कैंसर से पीड़ित थी। वैज्ञानिक अपनी इस शोध को मरीज़ो के ऊपर इस्तेमाल करने से पहले एक बार और परीक्षण करना चाहते है, ताकि इस शोध से पूर्ण आश्वासन प्राप्त किया जा सके।

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