ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए बीफ बैन जरुरी - अमेरिकी शोध

भारत में इन दिनों

6 months ago
ग्लोबल वार्मिंग कम करने के लिए बीफ बैन जरुरी - अमेरिकी शोध

भारत में इन दिनों बीफ बेन का मुद्दा काफी गरमाया हुआ है। ऐसे में अमेरिकी शोधकर्ताओं द्वारा की एक स्टडी से बात पता चला है कि बीफ को बेन करने से ग्लोबल वार्मिंग को कम करने में मदद मिल सकती है। 

अमेरिका के चार विश्वविधालय की शोधकर्ताओं की एक टीम ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगर हम गोमांस के स्थान पर बींस खाने लगें तो जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैस (जीएचजी) को बहुत तेजी से कम किया जा सकता है। जो जलवायु परिवर्तन का मुख्य कारण है।


कैलीफोर्निया की लोमा लिंडा यूनिवर्सिटी (एलएलयू) (6.3-7) से इस शोध की प्रमुख हेलेन हारवाट के अनुसार, "अगर अमेरिकी लोग गोमांस की बजाय बीन्स खाना शुरू कर दें तो, उन्हें तत्काल यह अहसास होगा. अमेरिका 2020 के लिए ग्रीनहाउस गैसों में कमी लाने के लक्ष्य का 50 से 75 प्रतिशत हासिल कर लेगा. इसके लिए उसे वाहन या विनिर्माण क्षेत्रों पर नए मानदंड लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी."

शोधकर्ता बहुत समय से ग्रीनहाउस गैस की कटौती करने के लिए आहार प्रणाली में बदलाव में बातें कर रहे है। परन्तु अभी तक  आहार खपत को जलवायु परिवर्तन नीति में ऊर्जा उत्पादन और परिवहन के मानकों को शामिल नहीं किया गया है।  

शोधपत्रिका 'क्लाइमेट चेंज' के ताजा अंक में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि “उन्होंने गोमांस की जगह बींस को आहार में शामिल करने पर ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में आने वाले परिवर्तन के लिए कैलोरी और प्रोटीन को लेकर सामान्य विश्लेषण किया।”

Source = Pinterest

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अभी इस जलवायु नीति के विकल्प के रूप में आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, परन्तु अगर जलवायु परिवर्तन को काफी कम करना है तो गोमांस की जगह बींस का प्रयोग बहुत सहायक होगा। साथ ही पर्यावरण को इससे अन्य लाभ भी होंगे।

शोधकर्ताओं का कहना है कि आहार के रूप में गोवंश के जानवरों की अपेक्षा फलियों (बीन्स, मटर) के उत्पादन में 40 गुना कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन होता है.

उनके अनुसार, "हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि मांसाहार खाद्य के स्थान पर पौधों से प्राप्त खाद्य पदार्थों का उत्पादन जलवायु परिवर्तन का जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।"

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