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सी-ग्रेड वाले पुरुष खिलाडियों से भी कम पैसे मिलते हैं महिला क्रिकेट की सीनियर खिलाडियों को

भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने हाल हीं में एक

1 year ago
सी-ग्रेड वाले पुरुष खिलाडियों से भी कम पैसे मिलते हैं महिला क्रिकेट की सीनियर खिलाडियों को

भारतीय क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई ने हाल हीं में एक नई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट जारी की है। इस नई लिस्ट को जारी करते हुए बीसीसीआई के अधिकारीयों ने कहा है की क्रिकेट प्रशासकों की समिति (सीओए) का ऐसा मानना है कि भारत के क्रिकेट को भी बाकी देशों के टीम के प्रदर्शन तथा स्थिति के अनुसार दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शुल्क ढांचे की तरह हीं बनाये रखने की आवश्यकता है। पर बीसीसीआई ने भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों की शुल्क भले हीं दुनिया के बाकी देशों के क्रिकेट खिलाड़ियों की शुल्क के बराबर कर दिया हो, पर उन्होंने अपने ही देश की महिला क्रिकेट टीम की खिलाड़ियों के साथ फिर एक बार भेदभाव कर दिया है।

महिला और पुरुष खिलाड़ियों की फीस में भेदभाव

रैंक के आधार पर अगर हम देखें तो एक तरफ जहां हमारे पुरुष टीम में मौजूद ए प्लस ग्रेड वाले प्लेयर्स को अब 7 करोड़ रुपए मिलने वाले हैं वहीं दूसरी तरफ हमारी महिला टीम की टॉप ग्रेड में आने वाली खिलाड़ियों को केवल 50 लाख रुपए की रकम मिलेगी। टॉप ग्रेड को अगर हम एक बार के लिए छोड़ भी दें तो भी महिला क्रिकेट खिलाड़ियों के साथ हो रहा भेदभाव बिलकुल स्पष्ट तौर पर नजर आता है। पुरुष क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को चार अलग अलग ग्रेड में बांट दिया गया है। इन चारो ग्रेड्स में से जो सबसे निम्न ग्रेड है वो है ग्रेड सी। इस ग्रेड सी के पुरुष क्रिकेट खिलाड़ी को 1 करोड़ रुपए की रकम मिलेगी। पर जब बात महिला क्रिकेट टीम की आती है तो महिला टीम की कप्तान और दूसरी प्रमुख खिलाड़ी जिनमे कप्तान मिताली राज, स्मृति कौर, झूलन गोस्वामी और हरमनप्रीत कौर आदि शामिल हैं को मिलने वाली रकम होगी सिर्फ 50 लाख रुपये।

सी ग्रेड के पुरुष खिलाडियों से भी कम राशि मिलेगी महिला खिलाडियों को

महिला और पुरुष क्रिकेट खिलाड़ियों को बीसीसीआई द्वारा जारी किये गए इस सालाना अनुबंध को देखने पर पता चलता है कि जहाँ एक तरफ पुरुष टीम के सी ग्रेड अनुबंध में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अभी तक टीम में आये भी नहीं है पर उन्हें 1 करेाड़ रुपये की बड़ी रकम मिलने वाली है वहीं दूसरी तरफ देश और विदेश में पूरे साल भारतीय टीम का नाम रौशन करने वाली महिला क्रिकेट खिलाड़ी उनके मुकाबले में बस आधा पैसा हीं कमा पाएंगी।

इन कारणों से मिलती है महिला खिलाड़ियों को पुरुष खिलाड़ियों से कम पैसे

वैसे तो पिछले कुछ सालों में महिला क्रिकेट की लोकप्रियता में काफी उछाल आया है, परन्तु अभी भी महिला क्रिकेट में पुरुष क्रिकेट की तरह बड़े बड़े स्पांसर की बहुत कमी देखी जाती है। इसी कारण से पिछले दिनों जब दक्षिण अफ्रीका में भारतीय टीम  द्विपक्षीय सीरीज खेलने गई थी तब उनके साथ साथ भारतीय महिला क्रिकेट टीम के भी मैच वहां चल रहे थे पर महिलाओं के वनडे सीरीज के दौरान हुए मैचों का प्रसारण किसी भी चैनल पर नहीं हुआ। हाँ बाद में हुए महिलाओं के टी20 मैचों का सीधा प्रसारण  चैनलों पर किया गया। इसके अलावा सबसे बड़ा कारण इन दोनों में भेदभाव का यह है की महिला क्रिकेट टीम के मैच पुरुष क्रिकेट टीमों के बनिस्पत काफी कम संख्या में होते हैं। 

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