जानिए भारत में बन रहे विश्व के सबसे ऊंचे मंदिर की क्या है खासियत?

भारत एक धार्मिक देश है। यहाँ हर धर्म का व्यक्ति बहुत ही ख़ुशी-ख़ुशी रहता है। यही कारण है कि भारत को सांप्रदायिक देश कहा जाता है।

3 years ago
जानिए भारत में बन रहे विश्व के सबसे ऊंचे मंदिर की क्या है खासियत?

भारत एक धार्मिक देश है। यहाँ हर धर्म का व्यक्ति बहुत ही ख़ुशी-ख़ुशी रहता है। यही कारण है कि भारत को सांप्रदायिक देश कहा जाता है। यह तो सभी जानते है कि भारत पुरातन काल से ही तीर्थ स्थलों का गढ़ रहा है। आज हम आपको यहाँ बन रहे एक मंदिर के बारे में बता रहे है। जो अभी निर्माणाधीन है, लेकिन इसकी विशेषताओं को जानकर आप भी आश्चर्य में पड़ जायेंगे।

जी हां, उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक मंदिर का निर्माण कार्य चल रहा है। बताया जा रहा है कि यह दुनिया का सबसे ऊंचा मंदिर होगा। जो साल 2020 तक बनकर पूरा हो जायेगा।   

परियोजना निदेशक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुव्यक्त नरसिम्हा दास ने बताया कि 'भारत ही नहीं दुनिया के सबसे उंचे मंदिर की परिकल्पना के साथ बनाए जा रहे इस मंदिर का निर्माण 2020 तक पूरा हो जाएगा जहां भारतीय वास्तुकला और आधुनिक वास्तुकला का संगम होगा।'

क्या है विशेषता?

Source = Krishnabhumi

मथुरा जिले के वृदवान में बन रहा यह मंदिर भगवान कृष्णा को समर्पित है। जिसका नाम 'वृंदावन चन्द्रोदय मंदिर' रखा गया है। इस मंदिर का निर्माण इस्काॅन की बैंगलोर इकाई के संकल्पतः करीब 300 करोड़ की लागत से तैयार किया जा रहा है।

  • इस अतिभव्य मंदिर का मुख्या आकर्षण इसकी ऊंचाई होगी, जो 700 फुट यानी 213 मीटर ऊँची होगी, जो किसी 70 मंजिला ईमारत की तरह दिखाई देगा। इसकी ऊंचाई के कारण ही यह मंदिर विश्व  का सबसे ऊंचा मंदिर बन जायेगा।
  • इस मंदिर के निर्माण के लिए मधू पंडित दास ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से बात चीत की थी। इसके बाद 16 नवम्बर 2014 को  राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी द्वारा इसका शिलान्यास किया गया।
  • इस मंदिर के डिजाइन के लिए अमेरिका के इंजीनियरों से सहायता ली जा रही है।
  • यह इस्कॉन द्वारा बनाये जा रहे विश्व के सबसे महंगे मंदिरों में से एक है। इस मंदिर को इस तरह से बनाया जा रहा है कि साल भर के सभी त्योहारों को यहाँ पर मनाया जा सके।
  • इस मंदिर का पूरा ढांचा करीब 500 से भी अधिक स्तंभों पर खड़ा किया जायेगा। जिसमें प्रत्येक का व्यास एक मीटर और उंचाई 55 मीटर होगी।
  • इसकी एक खास बात यह भी है कि सबसे ऊंची ईमारत होने के बावजूद भी यह भूकंप रोधी होगी।
  • यहाँ 12 एकड़ की भूमि पर पार्किंग व्यवस्था की गयी है। जिसमें 4500 कारे एकसाथ खड़ी की जा सकती है और हेलीपेड व्यवस्था के बारे में भी विचार किया जा रहा है।
  • मंदिर के शिखर पर एक दूरबीन रखी जाएगी जहाँ से आप पुरे मंदिर परिसर का नजारा देख सकेंगे।  
  • श्रद्धालुओं के रहने और भोजन की व्यवस्था का भी पूरा इंतजाम किया गया है।


प्राकृतिक वन का निर्माण

Source = Iskconbangalore

यह तो सभी जानते है कि भगवान कृष्ण को वन और वन्य प्राणियों से खासा लगाव था। इसी के अनुरूप ही इस मंदिर के चारों ओर 26 एकड़ के भूभाग पर 12 कृत्रिम वन बनाये जायेंगे। जो मनमोहक हरेभरे फूलों और फलों से लदे वृक्षों, रसीले वनस्पति उद्यानों, हरी लंबी चराईयों, हरे घास के मैदानों और कमल पुष्पों के जलाशयों से सजा कुमुद वन होगा।

जिन्हें विशेश रूप से पूरी तरह हूबहू श्रीमद्भागवत एवं अन्य शास्त्रों में दिये गए, कृष्णकाल के ब्रजमंडल के 12 वनों के विवरण के अनुसार ही बनाया जाएगा ताकी श्रद्धालुओं को कृष्णकाल के ब्रज का आभास कराया जा सके।

यमुना नदी के जैसा ही यहाँ कृत्रिम झरने का निर्माण किया जाएगा जिसमें पर्यटक नाव की सैर भी कर पाएंगे और बच्चों को भी इस नौकायन की सैर में मजा आएगा साथ ही वन में कृष्ण-लीला देखने को भी मिलेगी।

मंदिर की संरचना

Source = Indianeagle

मुख्य मंदिर पारंपरिक नागरा वास्तुशैली और आधूनिक वास्तुशैली का मिश्रण है। साथ ही शिखर की मुहार में कांचयुक्त आवरण भी होगा। शिखर के केंद्र से एक सुरंग जाएगी जिसमे से श्रद्धालु एक बबल-लिफ्ट की मदद से चर्मोत्कर्ष पर स्थित दर्षण पटल तक जा सकेंगे। जिसपर से पूरे ब्रजमंडल का मनमोहक दृश्य देखा जा सकेगा।

संग्रहालय और प्रदर्शनी

Source = Newmorningnews

परियोजना निदेशक और वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुव्यक्त नरसिम्हा दास  के बताया कि "मंदिर परिसर में एक भागवत पुराण एक्सपो और कृष्ण संग्रहालय भी आकषर्ण का केंद्र होंगे जिनके माध्यम से पुराणों में वर्णित भगवान कृष्ण के कलात्मक उत्सवों का भारत की विभिन्न संस्कृतियों के आधार पर प्रदर्शन किया जाएगा।"

उन्होंने आगे कहा कि "मंदिर के भूतल से लिफ्ट उपर तक ले जाएगी। जिसमें त्रिआयामी ध्वनि और प्रकाश शो के माध्यम से ब्रह्मांड की छवि दिखाई जाएगी। लिफ्ट 700 फुट तक उंचाई पर ले जाएगी जहां से ब्रज क्षेत्र का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा।"

दास के अनुसार "इस व्यापक परियोजना के साथ ब्रज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए अक्षय पात्र मध्याह्न भोजन कार्यक्रम और वृंदावन की विधवाओं के लिए कल्याणकारी कार्यक्रमों को और मजबूत बनाने का उद्देश्य है। इसके साथ ब्रज के विभिन्न स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा और यमुना नदी पर ध्यान दिया जाएगा।"

निर्माणकार्य में सहायक सलाहकार

Source = Etnow

  • डिजाइन सलाहकार - IIT दिल्ली के सिविल इंजीनियरिंग 
  • स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट - थार्नटन टाॅमासेटी (USA)
  • वास्तुकार - जीनियस स्टूडियो प्रा० लि० (गुड़गाँव)
  • कृत्रिम वनो का निर्माण - क़विंटेस्सेन्स डिज़ाइन स्टूडियो नौएडा
  • एचवीएसी (हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग) - गुप्ता कंसल्टेंट्स ऐंड एसोसिएट्स
  • विद्युत उपकरण और तारें - डबल्यूबीजी कंसल्टेंट्स

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