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क्यों स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के लिए इतना खास है

आज सरदार वल्ल्भ भाई पटेल की जयंती पर भारत सरकार द

7 months ago
क्यों स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के लिए इतना खास है

आज सरदार वल्ल्भ भाई पटेल की जयंती पर भारत सरकार द्वारा श्रद्धांजलि के रूप में दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का लोकार्पण किया गया है । इस प्रतिमा का लोकार्पण माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा किया गया है। इस प्रतिमा का नाम “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” के नाम पर रखा गया है। यह प्रतिमा अमेरिका में स्थित “स्टैच्यू ऑफ़ लिबर्टी” से दोगुनी बड़ी है और अब यह प्रतिमा दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा है। 

नडियाद (गुजरात) में जन्मे सरदार वल्ल्भ भाई पटेल एक कृषक परिवार से थे। उन्होंने लन्दन से बैरिस्टर की पढ़ाई की और फिर भारत आकर अहमदाबाद में वकालत करने लगे। गाँधी जी से प्रेरित होकर उन्होंने स्वाधीनता आंदोलन में हिस्सा लिया। 

इनका सबसे पहला आंदोलन “खेड़ा संघर्ष” था। जिसमे उन्होंने गुजरात के खेड़ा खंड जो उस समय सूखे की चपेट में था और अंग्रेजो ने वहाँ कर में भारी वृद्धि कर दी थी जिसे कम करने के लिए उन्होंने आंदोलन किया था। इस आंदोलन में उन्हें सफलता मिली, यह उनकी पहली सफलता थी। फिर उन्होंने “बारडोली सत्याग्रह” किया जो एक किसान आंदोलन था, इसमें भी वे सफल हुए थे। इस सफलता के कारण वहाँ कि महिलाओं ने उन्हें “सरदार” की उपाधि दी। 

आज़ादी के पहले जब भारत की सब रियासतें अलग अलग अपने राज्य को आज़ाद करवा कर अपना अपना स्वतंत्र देश बनाना चाहते थे तब “सरदार वल्लभ भाई पटेल” ने “पी वी मेनन” के साथ मिलकर सभी राजाओं को समझाया और एक साथ एक देश बनाने के लिए राजी किया। इसके फलस्वरूप 3 राज्य जम्मू कश्मीर, जूनागढ़ और हैदराबाद को छोड़कर सभी राज्य एक देश बनाने को तैयार हो गए। सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने सभी राज्यों को एक साथ करके एक देश बनाकर एकता की मिसाल पेश की थी। यही कारण है कि इस प्रतिमा का नाम  “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” रखा गया। इसलिए यह प्रतिमा भारत के भारत के लिए बहुत खास है। 

ये ख़ासियत है इस प्रतिमा में

  1. यह मूर्ति दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति है जिसकी ऊचाई 182 मीटर है। इसका वजन लगभग 1700 टन है। 
  2. इस प्रतिमा के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अभियान चलाया था जिसमे पूरे देश से लोहा मंगाया था। 
  3. यह प्रतिमा 180 कि.मी रफ्तार से चलने वाली हवा में भी खड़ी रहेगी। इस पर 6.5 तीव्रता के भूकंप का भी कोई असर नहीं होगा। 
  4. इस प्रतिमा को बनाने में भारतीय मज़दूरों के साथ 200 चीनी कर्मचारियों ने भी काम किया है। 
  5. इस मूर्ति ने सबसे ऊंची मूर्ति होने के साथ सबसे कम समय में तैयार होने का भी रिकार्ड बनाया है। 
  6. इस प्रतिमा में 85 प्रतिशत तांबे का उपयोग किया है। 
  7. इस प्रतिमा में कांसे की परत को छोड़कर पूरा निर्माण भारत में हुआ है।

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