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ट्रंप और पुतिन को पीछे छोड़, मोदी 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' की दौड़ में सबसे आगे

अमेरिका की जानी मानी समाचार पत्रिका टाइम ने दुनि...

7 years ago
ट्रंप और पुतिन को पीछे छोड़, मोदी 'टाइम पर्सन ऑफ द ईयर' की दौड़ में सबसे आगे

अमेरिका की जानी मानी समाचार पत्रिका टाइम ने दुनिया के 100 प्रभावशाली लीडर्स की सूची जारी की है। साल 2017 के लिए जारी की गई सूची में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा को भी शामिल किया गया है। टाइम मैगजीन ने पीएम मोदी को दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में दूसरा स्थान मिला है।

100 लोगो की इस सूची में दुनिया भर के कलाकारों, नेताओं और प्रमुख हस्तियों को जगह मिली है। इस पत्रिका में इनकी महत्वकांक्षी सोच, नवपरिवर्तन और समस्याओं को हल करने में उनकी प्रतिभा को लेकर सम्मानित किया गया है। इस सूचि में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरेसा को भी अपनी सूची में शमिल किया गया है।


पीएम मोदी सबसे आगे

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टाइम पत्रिका (3.1-4) में प्रधानमंत्री मोदी का प्रोफाइल लेखक पंकज मिश्रा ने लिखा है। पंकज ने कहा  है कि डोनाल्ड ट्रंप के युएस के प्रेसिडेंट बनने की कल्पना से भी काफी पहले ही मई 2014 में मोदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के पीएम बन गए।

इसमें यह भी बताया गया है मुस्लिम विरोधी हिंसा में उनकी संदिग्ध भूमिका को लेकर कभी अमेरिका ने उन पर पाबंदी लगा दी थी। यहाँ तक कि भारत में भी उनका राजनीतिक रूप से बॉयकाट किया गया था।

मोदी ने ‘टाइम पर्सन ऑफ दी ईयर’ का ऑनलाइन रीडर सर्वेक्षण जीता

किन्तु नरेंद्र मोदी ने हिंदू राष्ट्रवादी परंपरागत मीडिया को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने ट्विटर का इस्तेमाल कर वैश्विकरण में पीछे छूटता महसूस कर रहे लोगों से सीधे तौर पर जुड़े और उनसे बात की। 

मोदी जी ने स्वार्थी संभ्रांत वर्ग को हटा दिया और भारत को फिर से महान बनाने का वादा किया। इनकी प्रोफाइल में बताया गया है कि सत्ता में आने के करीब तीन साल बाद भारत की आर्थिक, भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक सर्वोच्चता के बारे में मोदी की दूरदृष्टि साकार होने से कोसों दूर है।

इसके बावजूद भी मोदी का आभामंडल खत्म नहीं हुआ। वह राजनीतिक रूप से आकर्षित करने, डर की भावना से खेलने और नीचे धकेल दिए जाने या अवरूद्ध गतिशीलता का सामना कर रहे लोगों की सांस्कृतिक असुरक्षा से खेलने की कला में माहिर हैं। यूपी में शानदार चुनावी जीत में उन्होंने साबित कर दिया है कि निर्वाचित शक्तिशाली लोग संभ्रांत वर्ग के खिलाफ वैश्विक विद्रोह का फायदा उठाने वालों में प्रमुख हैं।


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